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नवजात शिशॠको होने वाले पीलिया के बारे में जानिये 5 बातें
डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ के कà¥à¤› दिनों बाद à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ का दोबारा पीलिया का चेकअप ज़रूर करवाà¤à¤‚!
हर साल 28 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को विशà¥à¤µ हेपेटाइटिस दिवस के रूप में मनाया जाता है। नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया (Neonatal jaundice) होना à¤à¤• सामानà¥à¤¯ बीमारी है और अकà¥à¤¸à¤° यह जनà¥à¤® के शà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤¤à¥€ पांच दिनों के अंदर ही होता है। à¤à¤¸à¤¾ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के शरीर में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के बॠजाने के कारण होता है। बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ रेड बà¥à¤²à¤¡ सेलà¥à¤¸ में मौजूद पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ बà¥à¤²à¤¡ के विघटन से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ à¤à¤• तरह का गंदा पदारà¥à¤¥ है। इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में पंचकà¥à¤²à¤¾ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ पारस बà¥à¤²à¤¿à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के कंसलटेंट नियोनैटोलॉजी डॉ. मनॠशरà¥à¤®à¤¾ शिशà¥à¤“ं में होने वाले पीलिया से जà¥à¥œà¥‡ कà¥à¤› ख़ास तथà¥à¤¯ के बता रहे हैं।
जब बचà¥à¤šà¤¾ मां की गरà¥à¤ में बढ़ रहा होता है तो पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤¨à¥à¤Ÿà¤¾ शरीर से बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को हटा देता है जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प अधिकांश नवजात शिशà¥à¤“ं में जनà¥à¤® के तà¥à¤°à¤‚त बाद बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ का लेवल बढ़ जाता है। आंकड़े बताते हैं कि लगà¤à¤— 60% नवजात शिशॠपीलिया से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं जो उनके जनà¥à¤® के दूसरे या तीसरे दिन से शà¥à¤°à¥‚ होता है। अगर लंबे समय तक इसका इलाज नहीं किया जाता है तो शिशà¥à¤“ं में पीलिया से गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ पैदा हो सकती हैं और बाद में गंà¤à¥€à¤°à¤°à¥‚प से मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को à¤à¥€ कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚च सकती है।
शिशॠजनà¥à¤® के तà¥à¤°à¤‚त बाद पीलिया से पीड़ित हो सकता है जिससे उनकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पीली हो जाती है। वयसà¥à¤•ों की अपेकà¥à¤·à¤¾ नवजातों में रेड बà¥à¤²à¤¡ सेलà¥à¤¸ का लाइफ सà¥à¤ªà¥ˆà¤¨ आमतौर पर कम होता है और लीवर बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के बढ़े à¤à¤¾à¤° को संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ के लिठअपरिपकà¥à¤µ होता है। इसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ बनने और उतà¥à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¨ के बीच असंतà¥à¤²à¤¨ के कारण ही पीलिया हो जाता है।
सामानà¥à¤¯ तौर पर फà¥à¤²à¤Ÿà¤°à¥à¤® बेबी की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में पà¥à¤°à¥€ मैचà¥à¤¯à¥‹à¤° बेबी में पीलिया होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहती है। इसके पीछे à¤à¤• कारण यह हो सकता है कि नवजात शिशॠका बढ़ने वाला लीवर बà¥à¤²à¤¡ से परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को हटा नहीं पाता है या आंत में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को तेजी से अवशोषित करने की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ होती है।
हालांकि कई माता-पिता बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के समय पीलिया को बहà¥à¤¤ हलà¥à¤•े में लेते हैं लेकिन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस बात पर विशेष रूप से धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिठकि इस बीमारी से à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में इंटरनल बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग, लीवर की बीमारी, इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤”र अनà¥à¤¯ गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ पैदा हो सकती हैं। हालांकि पीलिया से पूरी तरह से बचने का कोई विशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ तरीका नहीं है लेकिन इससे पैदा होने वाले जोखिम के बारे में जानकारी होने से इससे लड़ने के लिठतैयार रहा जा सकता है और शिशॠका बचाया जा सकता है।
सà¤à¥€ नवजात शिशà¥à¤“ं में पीलिया का जरूरी परीकà¥à¤·à¤£ कर हर बार उनके महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ आंकड़ों को मापते रहना चाहिये। हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² से डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ होने से पहले और डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ होने के कà¥à¤› दिन बाद à¤à¥€ आप पीलिया का चेकअप ज़रूर करवाà¤à¤‚।
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